Tuesday, March 11, 2008

बजट, वेदांती एंव अडवानी जी की सभा

देरी के लिये क्षमा प्रार्थी हुं दरअसल आफिस के कार्यो मे व्यस्तता के चलते अपने ब्लाग मे नही आ सका, इस दौरान बहुत सारी बाते हुई। सिलसिलेवार इन पर गौर करुंगा।
बजट :- सब ने बजट सुना, पढा, और समझा अपनी राय भी दी और कुछ ने कहु तो थोपी भी। पर सभी ने इसे ऎतिहासिक बजट कहा, निश्चितरुप से ऎतिहासिक बजट है,किसानो के लिये और कांग्रेसजनों के लिये, वास्तविक किसानों को कितना लाभ होगा इसका आकलंन करना होगा। आयकर की सीमा बढाने से प्रत्येक व्यक्ति को फायदा होगा। इन सब बातो का कांग्रेस को कितना फायदा होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम आम जनता तक इन प्रावधानों को किस तरह और कितनी जल्दी पहुचा पाते है। मै आप को बताउ अप्रेल माह मे महामंत्री होने के नाते मैने शहर कांग्रेस का एक महत्वकांक्षी कार्यक्रम बनाया है जिसके सफल क्रियान्वयन के लिये मुझे बहुत सारी तैयारीया करनी पड रही है यह योजना मेरे राजनीतिक जीवन के लिये मील का पत्थर साबित हो सकती है अपने तरह के इस कार्यक्रम की प्रेरणा मुझे आदरणीय श्री संजीत त्रिपाठी जी की मेरे ब्लांग को भेजी गयी एक टिप्पणी से मिली। (क्रमश:)

Friday, February 15, 2008

पं. श्यामाचरण शुक्ल की प्रथम पुण्य तिथी

१४ फरवरी का दिन श्रद्देय श्याम भैय्या की प्रथम पुण्य तिथी थी, पिछले चंद दिनो से इस दिवस पर होने वाले कार्यक्रमो की तैयारीयों मे व्यस्त रहने की वजह से ब्लाग पर नही आ सका, क्षमा चाहुंगा। कांग्रेस भवन के आयोजन मे ्शहर कमेटी के समस्त पदाधिकारियों के अलावा श्री विध्याचरण शुक्ल, श्री अमितेश शुक्ल, श्री धनेन्द्र साहु जी उपस्थित थे, इस अवसर पर श्रीमती पदमिनी शुक्ल की उपस्थिती विशेष रही। सुबह ९.३० बजे महादेव घाट के करीब श्याम घाट जंहा श्याम भैय्या की समाधी का निर्माण हो रहा है वहा बापु के भजनो का गायन श्री मदन चौहान द्वारा किया गया सभी उपस्थित जनों ने समाधी पर श्रद्दा सुमन अर्पित किये, मुख्य कार्यक्रम शहीद स्मारक भवन मे दोपहर २ बजे से प्रारंभ हुआ इसका आयोजन परिवार जनो द्वारा निर्मित पं. श्यामाचरण शुक्ल फाऊडेशन द्वारा किया गया, प्रमुख वक्ताओं ने अपने शब्दो से पं. श्यामाचरण शुक्ल का पुण्य स्मरण किया उनमे केन्द्रीय मंत्री सर्वश्री शिवराज जी पाटिल, श्री रामचंद्र सिहदेव, कुलपति श्री लक्ष्मण चतुर्वेदी, श्री केयुर भुषण, श्री कनक तिवारी, श्री महेन्द्र कर्मा, श्री चरणदास महंत शामिल थे.

Friday, February 8, 2008

केशकाल चुनाव - विश्लेषण अपने अपने

कल केशकाल विधान सभा उपचुनाव के मतो की गिनती हुई,एक और चुनाव मे कांग्रेस की हार। उक्त सीट भाजपा के महेश बघेल के असामयिक देहांत की वजह से रिक्त हुई। विद्वान पत्रकारों सहित विभिन्न नामी गिरामी नेताओ ने अपनी अपनी तरह से हार जीत का विषलेश्ण किया, सबके अपने अपने तर्क है, किसी ने ३ रु चावल को, किसी ने कांग्रेस की गुटबाजी को तो किसी ने कुशल प्रबंधन को हार जीत का कारण बताया। यधपि शहर कांग्रेस कमेटी का एक दल अध्यक्ष इंदरचंद धाडीवाल के साथ अंतिम दिनो मे पहुंचा चुंकि मुझे रायपुर मे ही रुकना था अत: मै ना जा सका। लेकिन जो हुआ उसे हम अप्रत्यासित नही कह सकते, अपनी पार्टी की हार के लिये मै पुराने घिसे पीटे कारणो को गिना कर अंधों के बाजार मे चश्मे बेचने का काम नही कर सकता क्योंकि मेरे व्यक्तिगत विचार मे यही हमारे हार और घटती लोकप्रियता का कारण है, सिर्फ यही एक कारण नही है और भी है जिनके विषय मे पदाधिकारी होने के कारण सार्वजनिक रुप से कहना उचित नही होगा फिर भी आप से कहुं और जैसे कि मैने अपने पुर्व के चिठठे मे शायद कही उल्लेख किया था कि कांग्रेस को अपनी जडों की ओर लौटना होगा जडो से मेरा तात्पर्य अपने बुथ मे बैठने वालों को, पर्ची वितरण करने वाले कार्यकर्ताओं को मान सम्मान देना होगा, उनके सुख दुख मे साथ देना होगा, जनता के घरों मे पहुंचना होगा। मेरा तो यहा तक मानना है कि वर्तमान मे बदली परिस्थितयों मे कांग्रेस को चुनाव लडना फिर से सीखना होगा । मै स्वंयं दो दफे पार्षद का चुनाव लड चुका हुं, रायपुर के महापौर सुनील सोनी, सभापति रतन डागा दोनो से ही बहुत ही कम अंन्तर से मेरी हार हुई पर वास्तव मे मेरी हार का कारण भाजपा के दोनो प्रत्याशीयों का फर्जी वोटिंग मे हासिल महारत है, और भी बहुत से कारण है, परन्तु मै ईश्वर पर विश्वास करने वाला व्यक्ति हुं और मुझे मालूम है कि ऊपर वाले की जब लाठी चलती है तो उसमे आवाज नही होती । मुझे तो ईश्वरी शक्ति पर पुरा विश्वास है बस इंतजार है तो समय का, माफ किजीयेगा मै अपने विषय से जरा भटक गया, हार के लिये गिनाने के वास्ते कारणो की कमी नही पर जो कारण गिनाये जा रहे है वो मन को सात्वांना देने के लिये तो ठीक हो सकते है पर आगमी विधान सभा चुनावो मे जीत दर्ज करने के लिये जरुरत है तो जडो की ओर लौटने की, रणनीति बदलने की, सिर्फ विरोध करने के लिये विरोध करना है वाली मानसिकता को बदलने की और उन लोगो को समने लाने की जो वर्षो से कांग्रेस के साथ है, ना कि उन्हे जो कभी ना कभी, कहि ना कहि , गांव गांव मे गली गली मे कांग्रेस और अप्रत्यक्ष रुप से ही सही हमारी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया जी के निर्णय की खिलाफत करते है।