कल केशकाल विधान सभा उपचुनाव के मतो की गिनती हुई,एक और चुनाव मे कांग्रेस की हार। उक्त सीट भाजपा के महेश बघेल के असामयिक देहांत की वजह से रिक्त हुई। विद्वान पत्रकारों सहित विभिन्न नामी गिरामी नेताओ ने अपनी अपनी तरह से हार जीत का विषलेश्ण किया, सबके अपने अपने तर्क है, किसी ने ३ रु चावल को, किसी ने कांग्रेस की गुटबाजी को तो किसी ने कुशल प्रबंधन को हार जीत का कारण बताया। यधपि शहर कांग्रेस कमेटी का एक दल अध्यक्ष इंदरचंद धाडीवाल के साथ अंतिम दिनो मे पहुंचा चुंकि मुझे रायपुर मे ही रुकना था अत: मै ना जा सका। लेकिन जो हुआ उसे हम अप्रत्यासित नही कह सकते, अपनी पार्टी की हार के लिये मै पुराने घिसे पीटे कारणो को गिना कर अंधों के बाजार मे चश्मे बेचने का काम नही कर सकता क्योंकि मेरे व्यक्तिगत विचार मे यही हमारे हार और घटती लोकप्रियता का कारण है, सिर्फ यही एक कारण नही है और भी है जिनके विषय मे पदाधिकारी होने के कारण सार्वजनिक रुप से कहना उचित नही होगा फिर भी आप से कहुं और जैसे कि मैने अपने पुर्व के चिठठे मे शायद कही उल्लेख किया था कि कांग्रेस को अपनी जडों की ओर लौटना होगा जडो से मेरा तात्पर्य अपने बुथ मे बैठने वालों को, पर्ची वितरण करने वाले कार्यकर्ताओं को मान सम्मान देना होगा, उनके सुख दुख मे साथ देना होगा, जनता के घरों मे पहुंचना होगा। मेरा तो यहा तक मानना है कि वर्तमान मे बदली परिस्थितयों मे कांग्रेस को चुनाव लडना फिर से सीखना होगा । मै स्वंयं दो दफे पार्षद का चुनाव लड चुका हुं, रायपुर के महापौर सुनील सोनी, सभापति रतन डागा दोनो से ही बहुत ही कम अंन्तर से मेरी हार हुई पर वास्तव मे मेरी हार का कारण भाजपा के दोनो प्रत्याशीयों का फर्जी वोटिंग मे हासिल महारत है, और भी बहुत से कारण है, परन्तु मै ईश्वर पर विश्वास करने वाला व्यक्ति हुं और मुझे मालूम है कि ऊपर वाले की जब लाठी चलती है तो उसमे आवाज नही होती । मुझे तो ईश्वरी शक्ति पर पुरा विश्वास है बस इंतजार है तो समय का, माफ किजीयेगा मै अपने विषय से जरा भटक गया, हार के लिये गिनाने के वास्ते कारणो की कमी नही पर जो कारण गिनाये जा रहे है वो मन को सात्वांना देने के लिये तो ठीक हो सकते है पर आगमी विधान सभा चुनावो मे जीत दर्ज करने के लिये जरुरत है तो जडो की ओर लौटने की, रणनीति बदलने की, सिर्फ विरोध करने के लिये विरोध करना है वाली मानसिकता को बदलने की और उन लोगो को समने लाने की जो वर्षो से कांग्रेस के साथ है, ना कि उन्हे जो कभी ना कभी, कहि ना कहि , गांव गांव मे गली गली मे कांग्रेस और अप्रत्यक्ष रुप से ही सही हमारी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया जी के निर्णय की खिलाफत करते है।
Friday, February 8, 2008
Saturday, January 26, 2008
गांधी के बाद गांधीवादी विचारधारा की हत्या का प्रयास आज भी जारी:शर्म करो,शर्मकरो
हमारी स्वतंत्रता के लिये अपने प्राणो की आहुति जिन लोगो ने दी उनमे से बहुत सारे लोगो के विषय मे हमे इतिहास के पन्नो से ही जानकारी उपलब्ध हो पाती है, इसके अलावा असंख्य लोग ऎसे है जिनके विषय मे हम मे से कईयो को जानकारी है भी नही परन्तु हम उन्हे भी नमन करते है, हम उन सैनिको को भी श्रद्वा सुमन अर्पित करते है जिन्होने स्वतंत्र भारत की सुरक्षा के लिये अपने प्राणों की आहुति दी । पर क्या करे भारत की इस विशाल जनसंख्या मे चंद तत्व ऎसे भी है जो गांधी और उनकी विचारधारा से जरा भी इतफाक नही रखते उनके अपने तर्क हो सकते है, तर्क के वितर्क हो सकते है पर क्या इस सच्चाई से कोई मुहं मोड सकता है कि गांधी जी ने अहिंसा के मार्ग को अपना कर इतने वर्षो के अंग्रेजों के शासन को समाप्त कर दिया, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने वालों को बापु के कार्यशैली पर कोई एतराज नही था वे तो बस आजादी चाहते थे, क्योकि गुलामी क्या होती है इसका अहसास शायद पढ्कर, और सिनेमाओ मे देखकर नही लगाया जा सकता है। इसलिये उन लोगो पर जो बापु के विरोधी है, उनके कार्यों के विरोधी है, जो बापु और उनकी विचारधारा से इतेफाक नही रखते और बापु के प्रति जिनकी भावनाऎ अच्छी नही है और जो गांधीवादी विचारधारा की हत्या के प्रयास मे लगातार लगे है, उन्हे शर्म आनी चाहिये. आप सोच रहे होगें की आखिर आज मुझे हो क्या गया है? दर असल पिछले दिनो मै http:///www.hindujagruti.org" का अवलोकन कर रहा था उसमे गांधी जी के प्रति जो बाते लिखी गयी है उनमे से किसी भी बात का उल्लेख करना जरा भी उचित नही होगा।
गणतंत्र दिवस मनाया गया
इस वर्ष हमने गणतंत्र की ६० वी वर्षगांठ मनाई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुर्व केन्द्रीय मंत्री श्री विध्याचरण शुक्ल एंव अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य श्री अमितेश शुक्ल थे। सर्वधर्म प्रार्थना सभा सर्वोदयी नेता श्री हरप्रसाद जी अग्रवाल के नेतत्व मे की गयी, गांधीवादी विचार धारा वाले श्री अग्रवाल की पत्नी का देहांत २३ जनवरी को ही हुआ परन्तु फिर भी वे अपने आप को इस कार्यक्रम मे आने से ना रोक सके। कार्यक्रम के पश्चात सभी बुढापारा स्थित शुक्ल भवन के लिये रवाना हुये. कार्यक्रम का संचालन का सौभाग्य हमेशा की तरह मुझे प्राप्त हुआ। इस दौरान केशकाल उपचुनाव सर्वत्र छाया हुआ है, हमारे प्रदेश प्रभारी श्री व्ही. नारायण स्वामी, श्री विध्याचरण शुक्ल, डां. चरणदास महंत, मैदान मे डटे है, श्री अजीत जोगी जी का भी दौरा कार्यक्रम तय हो चुका है. राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री मोतीलाल जी वोरा के साथ श्री अमितेश शुक्ल भी शीघ्र ही चुनाव प्रचार के लिये केश्काल पहुचने वाले हैं। इन्ही कारणों से हमारा लोक जागरण अभियान कुछ समय के लिये लगभग स्थगित ही है।